Cycle & Monthly Period Problem ( मासिक धर्म संबंधी समस्या)
श्वेत प्रदर (Leucorrhoea)
कब्ज , गंदगी, ज़यादा सेक्स , आदि होता हैं !
इसमे स्त्रियों के योनि के रास्ते से सफेद , पीला या लाल रंग
का स्राव निकलता रहता हैं ! जिससे रोगिणी के कमर में दर्द,
योनि मुख मैं जलन , खुजलाहट होने लगती हैं ! स्त्रियाँ धीरे
धीरे कमजोर होने लगती हैं और अन्य कई रोग होने लगते हैं !
घरेलू उपचार :
जामुन के जड़ की छाल को घिस कर एक चम्मच उसका रस चावल के मांड के साथ लेने से पुराना प्रदर मैं लाभ होता हैं !
“Cycle & Monthly Period Problem ( मासिक धर्म संबंधी समस्या)श्वेत प्रदर रोगी रखें ब्रम्हचर्यासावधानी : श्वेत प्रदर के रोगी को सख्ती से ब्रम्हचर्या का पालन करना चाहिए !साथ ही एसी महिलाओं को गुप्ताँग की
सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए ! जो महिलाएँ सफाई पर असावधानी बरतती हैं उन्हे यह बीमारी अधिक होती हैं !
तुरंत आराम का घरेलू उपाय – श्वेत प्रदर रोगियों के लिए :
पलाश के 10-15 फूल को 200 ग्राम पानी मैं भिंगोकर उसका पानी पीने से इसमे लाभ होता हैंगुलाब के 5 ताज़ा फूल को मिशरी के साथ खाकर उपर से एक गिलास गाय का दूध पीने से श्वेत प्रदर सही होता हैं !
अवला और अश्वगंधा का मिस्रण इस रोग मैं रोगिणी को शक्ति प्रदान करता हैं !
Homeopathic Medicine
श्वेत प्रदर् / ऋितूस्राव रोगी जिन्हे जलन, प्यास, और बेचैनी हो :
आर्सेनिक एल्ब्म :
बेचैनी , प्यास और शारीरिक दाह इस दबा का प्रमुख लक्श्चन हैं ! जब कभी रोगी को ऋितूस्राव ना होकर उसके बदलेप्रदर का स्राव होता हैं ! रोगी कमजोर होता जाता हैं ! प्रदर का स्राव लगकर खाल गल जाती हैं ! जलन होती है और स्राव
बदबूदार होता है ! तो आर्सेनिक लेने से रोगी को तुरंत लाभ होगा!
तो कभी रक्त स्राव बहुत जल्दी जल्दी होता हैं ! जिससे रोगी रक्त
हिन और कमजोर हो जाता हैं !
श्वेत प्रदर् का स्राव जब दूध की मलाई की तारह गाढ़ा हो :
Palsatila :
यह द्वा उत्तरी अमेरिका मैं पाई जाने वाली एक वृकक्श्च के मूल अर्क से तैयार किया जाता हैं ! इसका स्ररी तथा पुरुषके जानेन्द्रिया एवम् मुत्रा यंत्रा पर प्रधान क्रिया होती हैं ! इस दबा के रोगी का मानसिक लक्श्चन नम्र, सहज मैं ही हसने
और रो देता हैं ! इस द्वा के रोगी का मत तुरंत बदल जाता हैं ! श्वेत प्रदर मैं स्राव का रंग दूध की मलाई जैसा गाढ़ा होता
हैं और साथ ही कमर मैं दर्द होता हैं ! कभी कभी रक्त मीला स्राव भी होता हैं ! इसमे योनि फूल जाती हैं!
डाक्टर हैनिमन के अनुसार पल्सेटीला का मासिक स्राव ठीक महीना ख़तम होने पर ना होकर बहुत देरी से होता हैं ! रक्त
स्राव भी बहुत थोड़ा होता हैं ! स्राव दिन मैं ज़्यादा और रात को थोड़ा होता हैं ! जरायू मैं दर्द , प्रसव के दर्द के समान वेग,
मरोड़, एटन , कमर मैं दर्द, सिर दर्द आदि लक्श्चन भी रहते हैं ! ऋितूस्राव रह रह कर होता हैं ! मतलब कभी हुआ ओर
बंद हो गया फिर हुआ! दर्द भी इसी तारह होता हैं ! रोगिणी खुले हवा मैं रहना चाहती हैं फिर उसे जाड़ा सा मालूम देता हैं !
इसमे स्राव काले रंग का , थक्का सा होता हैं !

साथ ही कुछ और दवाए हैं जिसमे पल्सातीला की तारह
लक्श्चन होता हैं साथ ही कुछ विशेष भेद होते हैं !
कैइमो मिला :
इसका ऋतु स्राव भी काले रंग का होता हैं किंतु रोगिणी का मानसिक स्वभाव कुछ इस तारह होता हैं , वह ज़रा सी बातपर नाराज़ हो जाती हैं , दर्द के कारण छटपटाया करती हैं , लोगों को गली देती हैं , और गुस्सा होती है!
मैगनिसिया म्यूर : दर्द बहुत अधिक रहता है और गर्भाशय कड़ा हो जाता हैं !
एल्युमिना :
इस दबा के रोगिणी की शारीरिक बनावट बहुत कमजोर होती हैं ! चेहरा सफेद , फीका , और रक्त हीनहोता हैं! एसी स्त्री मेहनत कतई नही कर सकती है! राज:स्राव बहुत देर से होता है और थोड़ा होता है! खून
का रंग लाल नही होता है किंतु फीके रंग का घुले पानी जैसा दिखाई देता हैं !
श्वेत प्रदर का स्राव सफेद या पीला और ऐसा लसदार की हाथ मैं चिपक जाता हैं! यह परिणाम मैं इतना अधिक होता है
की बहता हुआ पैर की एडी तक पहुच जाता हैं !
ग्रेफआईटीस :
महात्मा हेनिमॅन के अनुसार सभी बीमारियों मैं रोग की अपेक्षा रोगी के धातुगत लक्षण पर ध्यान देने कोकहते है ! ग्रेफआईटीस मैं तीन फ का ध्यान हमेशा रखना होता है!
इस द्वा की रोगिणी देखने मैं सुंदर , गोरी, मोटी ताजी और देह की थुल थुल होती है! इसकी रोगिणी देखने मैं मोटी ताजी
तो रहती है पर उसका शरीर रक्तशून्य होता है! ताक़त बिल्कुल नही रहती है ! अक्सर कब्ज, चर्म रोग, सर्दी ख़ासी आदि
बीमारी से तकलीफ़ पाया करती है ! एसा लक्षण होने पर ग्रेफआईटीस से रोगी को लाभ होगा !
खाल गाल जाती है! डाक्टर हरिंग का कहना है की प्रदर का स्राव ऋतु के पहले और बाद में होता है! बाई ओर के डिंब्कोष
मैं सूजन, कडापन, और स्पर्श सहन नही होना, यहाँ तक की हाथ लग जाने पर भी दर्द मालूम होना ! गर्भाशय बाहर
निकल जाता हैं ! उक्त लक्षण होने पर ग्रेफआईटीस फ़ायदा करती है!
यूपियाँन:
इस दावा के रोगी को दाहिनी डिंब्कोष मैं दर्द होता हैं ! प्रदर का स्राव रह रह कर झोंक से निकलता हैं ! इसका रोगी
ऋितूस्राव के समय बोलने की इच्छा नही रखता हैं ! उसके छाती और हृत्पिण्ड मैं जलन और डॅंक मारने की तारह दर्द
होता हैं ! इसका प्रमुख लक्श्चन है की ऋतु स्राव के बाद पीले रंग का प्रदर का स्राव होने लगता हैं साथ ही कमर मैं दर्द
होता हैं !
कमर का दर्द घटते ही प्रदर का स्राव बढ़ जाता है! जब प्रदर का स्राव होता है तो रोगिणी के योनि मुख मैं जलन होती हैं !
पेशाब बार बार आती हैं ! एसा लक्षण होने पर यूपियाँन फ़ायदा करती हैं ! इसकी 30 से 200 शक्ति का प्रयोग रोग की
प्रबलता के अनुसार करना चाहिए !
इस दावा के रोगी को दाहिनी डिंब्कोष मैं दर्द होता हैं ! प्रदर का स्राव रह रह कर झोंक से निकलता हैं ! इसका रोगी
ऋितूस्राव के समय बोलने की इच्छा नही रखता हैं ! उसके छाती और हृत्पिण्ड मैं जलन और डॅंक मारने की तारह दर्द
होता हैं ! इसका प्रमुख लक्श्चन है की ऋतु स्राव के बाद पीले रंग का प्रदर का स्राव होने लगता हैं साथ ही कमर मैं दर्द
होता हैं !
कमर का दर्द घटते ही प्रदर का स्राव बढ़ जाता है! जब प्रदर का स्राव होता है तो रोगिणी के योनि मुख मैं जलन होती हैं !
पेशाब बार बार आती हैं ! एसा लक्षण होने पर यूपियाँन फ़ायदा करती हैं ! इसकी 30 से 200 शक्ति का प्रयोग रोग की
प्रबलता के अनुसार करना चाहिए !
एपीस मेलीफ़ीका : (Apis Mellifica)
मधुमक्खी से इसका टींचर तैयार किया जाता है! किसी भी बीमारी मैं रोगी के शरीर का चमड़ा मोम की तारह सफेद हो
जाय , प्राय: प्यास ना रहे और पेशाब थोड़ा होता देखें तो सबसे पहले एपीस को याद करना चाहिए ! किसी भी बीमारी मैं
एपीस का प्रयोग करके 2-4 दिन राह देखनी चाहिए क्योंकि इसका प्रयोग धीरे धीरे होता हैं !
कोनियम मैकुलेटम :
यह एक प्रकार का जहर होता हैं ! कहा जाता हैं प्रख्यात दार्शनिक सुकरात की हत्या इसी जहर के देने से हुई थी ! इसकी
विष क्रिया के कारण पहले शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं फिर फेफड़े की क्रिया बंद होकर रोगी की मृत्यु हो
जाती हैं !
जैसा की आप सभी को पहले ही यह बताया जा चुका है (दो शब्द पेज पढ़े) की जिस दबा के खाने से शरीर मैं जो रोग
उत्पन्न होता हैं उसी दावा का सेवन करने से वो रोग सही होता हैं !
कोनियम निम्न रोगों मैं फ़ायदा करता हैं !
जैसे लकवा , सिर मैं चक्कर आना , पैरों का आँकड़ जाना , यादश्त की कमज़ोरी, सुस्ती , पेशाब से सम्बंध रखान वाली
बीमारी , बिरया का पतला पन्न, हृदय का तेज धड़कना , चोट लगाने या गिर जाने की वजह से होने वाले दर्द, स्त्री और
पुरुष दोनों मैं बुढ़ापे के समय होने वाले रोग, आदि मैं कोनियम फ़ायदा करती हैं!
इसके रोगी प्राय: किसी से मिलना जुलना पसंद नही करते हैं ! समाज मैं जाने से डरते हैं , ऐसे लोग ज़रा सी बात पर
उत्तेजित और नाराज़ हो जाते हैं ! किसी का भी प्रतिवाद बिल्कुल बर्दाश्त नही करते हैं ! ऐसे लोगों के रोग मैं कोनियम
फ़ायदा करती हैं !
जो स्त्रियाँ कोनियम की रोगी होती हैं उन्हे स्राव टिक समय पर नही होकर देर से होता हैं ! ऋतु एक या दो दिन बाद बंद
हो जाती हैं ! स्तन या तो बड़े हो जाते हैं और उसमे दर्द भी होने लगता हैं ! ऋतु के ठीक 8 – 10 दिन बाद स्राव प्रारंभ हो
जाता हैं जो की कभी खून मिला हुआ तो कभी सफेद दूध की तरह होता हैं ! कभी कभी यह बीच – बीच मैं बंद हो जाता हैं
! और फिर होने लगता हैं ! स्राव जहाँ लगता हैं वहाँ की खाल गाल जाती हैं! इसकी उच्च शक्ति ज़्यादा फ़ायदा करती हैं !
Saibaina (सैबाइना ) :
रोगी का ऋतु बंद होकर सड़ी गंधभरा , श्वेत्प्रदर होता हैं तो इस दावा के सेवन से लाभ होता हैं ! इसके रोगी को पीरियडके तारीख से पहले भी स्राव होता हैं साथ ही सेक्स की एच्छा भी रहती हैं ! ऋतु खूब जल्दी जल्दी और परिणाम मैं अधिक
होता हैं ! इसके रोगी का रक्त स्राव रुक रुक कर होता हैं जैसे अभी तोड़ा हुआ फिर रुक गया फिर कुछ देर बाद शुरू हो
गया !इसके स्राव का रंग गडला और काला थक्का थक्का होता हैं ! जबकि कभी कभी स्राव पतला और काला थक्का
होता हैं ! इसमे रक्त स्राव के साथ कूल्हे की हड्डी से लेकर जन्नेड्रिया की हड्डी तक खींच रखने की तरह दर्द होता हैं
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